रोशनी का जंगल...
बिखरे हैं जहां तहां
बेतरह उलझे
अंधेरों के झाड़ झंखाड़
उखाड़ उन्हें रोप दूंगी अब मैं
हर तरफ
रोशनी की बेलें
और तब फूटेंगी यहां वहां
कली... कली...
रोशनी की डली
उग आएगा चारों ओर
एक रोशनी का जंगल !!!
...
...
डोरोथी/ उज्जवला ज्योति तिग्गा
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