Neelam Madiratta
मेरा जिस्म भी रख, मेरी रूह भी रख,
रख रख रख मेरी जान भी रख,
तेरे गुनाहों का नहीं कोई सानी,
रख रख रख तू मेरी दुआआँ भी रख ...
मेरी साँस भी रख, मेरा प्यार भी रख,
रख रख रख तू मेरा मान भी रख,
दित्ता दित्ता मैं सब कुछ दित्ता,
रख रख रख तू मेरी शान भी रख ...
मेरा पाप भी रख, मेरा पुण्य भी रख,
रख रख रख मेरा बान भी रख,
छड्डा छड्डा मैं सब कुछ छड्डा,
रख रख रख तू मेरा लेखा भी रख ...
मेरा सच भी रख, मेरा झूठ भी रख,
रख रख रख तू मेरी आन भी रख,
मैं कहंदी मैं नहीं हाँ ! मैं नहीं हाँ !
रख रख रख तू मेरा भ्रम भी रख ...
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मैं रास्ता हूँ,
और मेरा भीगना तय है,
तुम जब भी बरसो !
और वो धूप भी,
मेरे हिस्से की है,
जब तुम बरसना ना चाहो !
और वो धूल,
मेरी आँख का काजल बने,
जो तेरे आवेग से उड़े !
और वो सोंधी सी महक,
जो मेरे जिस्म से उठती है तेरे आने पर,
सिर्फ और सिर्फ तेरी है ...
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